Kundali Bhagya क्या है ?

Kundali Bhagya क्या है ?

Kundali Bhagya किसी भी जातक के जीवन का रूपरेखा है जिसमें जातक के भविष्य के बारे में जाना जा सकता है एक विस्तृत तार पर कहां जाए तो इससे आप किसी भी व्यक्ति के जीवन की कुंडली भी कह सकते हैं।

Kundali Bhagya क्या है ?

आप सभी जानते हैं कि सनातन धर्म में कुंडली के माध्यम से किसी भी व्यक्ति विशेष की जीवनी का तथा इसके द्वारा लगाया जा सकता है कि उसके जीवन कल में किस समय अवधि में उसकी शादी होगी उसको बच्चे होंगे उसके करियर की शुरुआत कब होगी से गवर्नमेंट जॉब मिलेगी या नहीं मिलेगी विदेश जाने की योग है या नहीं है यह सारी बातें हम कुंडली के माध्यम से समझ सकते हैं।

कुंडली भाग्य के राशियों और ग्रहों से जाने व्यक्ति का भविष्य:

पंडित या ज्योतिषाचार्य के द्वारा जब किसी कुंडली का निर्माण किया जाता है तो कुंडली में 12 घर को बनाया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार की राशियां और ग्रह विराजमान होते हैं यह राशियां और ग्रह नक्षत्रों के आधार पर किसी भी व्यक्ति के जीवन काल की रचना करते हैं जिससे ज्योतिषाचार्य के द्वारा ही बड़ी आसानी से जाना जा सकता है कि उस व्यक्ति के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आने वाले हैं।

कुंडली भाग्य के द्वारा व्यक्ति के जीवन के उस पहलू को समझा जा सकता है जो कि उसके जीवनकाल में आने वाले एक समय में घटित होने वाला है उसके बारे में उस व्यक्ति को पहले ही सूचित कर दिया जा सकता है कि आपके साथ ऐसा होने की संभावना है कुंडली हिंदू धर्म में एक अलग स्थान बनाती है।

कुंडली में कुंडली भाग्य का विस्तृत अध्ययन के लिए हमें ज्योतिषाचार्य गण का सहारा लेना होता है क्योंकि जो कुंडली भाग्य कुंडली देखी जाती है वह एक फलित कुंडली होती है जिसमें ग्रह नक्षत्रों और राशियों का* होता है और इन सब के आधार पर कौन से ग्रह किस घर में बैठे हैं इन सब का आकलन करके ही उसका एक निश्चित नतीजा निकाला जाता है।

ज्योतिषाचार्य गण के द्वारा किसी कुंडली का निर्माण होने के बाद में उसके प्रथम घर यानी कि लग्नेश का घर से उस व्यक्ति के व्यक्तित्व को देखा जाता है कि व्यक्ति के स्वरूप रंग तन मन धन आदि की क्या विशेषताएं हैं इससे उस अभाव में बैठक ग्रहों दृष्टिगत ग्रहों के द्वारा देखा जाता है।

कुंडली भाग्य का दूसरा घर कुटुंब और धन का कारक माना जाता है यहां से उस व्यक्ति के द्वारा अर्जित किए हुए धन संपत्ति का विवरण देखने को मिलता है या फिर सीधी भाषा में कहा जाए तो उसके जीवन काल में धन आएंगे या नहीं आएंगे इसके बारे में जानकारी के लिए कुंडली भाग्य के द्वितीय घर का अध्ययन किया जाता है।

कुंडली का तीसरा घर जातक के छोटे भाई बहन का घर माना जाता है इसके साथ साथ आपके प्राक रमेश को भी देखा जाता है या घर जातक के जीवन का एक अलग होता है जो कुंडली भाग्य के रूप को संवार्ता है।

कुंडली भाग्य का चौथा घर जातक के सुखेष का घर माना जाता है और यही सही जातक की माता का जातक के साथ संबंध मुदिता को दिखाता है इसके साथ साथ जातक अपने जीवन में कितना सुखी रहने वाला है या घर इस चीज को भी दर्शाता है।

जातक की पत्रिका का पांचवा घर उसके विद्या पढ़ाई और संतान सुख का कारक माना जाता है यहां से जातक की शिक्षा दीक्षा और उसके जीवन के दांपत्य जीवन के साथ जोड़ने के साथ साथ संतान को भी यहीं से देखा जाता है।

छठवां घर जातक के कुंडली भाग्य का 17 घर माना जाता है यहां से जातक के जीवन काल के शत्रुओं की अनुभूति की आती है कि कौन से शत्रु जातक को परेशान करने वाले हैं यही सजा तक कोर्ट कचहरी और जेल तक की यात्रा करता है।

कुंडली भाग्य का सप्तमेश घर उस जातक के दांपत्य जीवन के बारे में बताता है की व्यक्ति दांपत्य जीवन को लेकर सुखी रहेगा या नहीं यह सारी बातें सप्तमेश देखी आती हैं और कुंडली भाग्य का यह सातवां घर होता है जो लगनेश को सीधा देखता है।

जातक कुंडली का आठवां घर उसके आयु और विद्या का घर माना जाता है यहीं से उस व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाले गंभीर बीमारियों की अनुभूत की जाती है और उसका निदान किया जाता है।

कुंडली भाग्य का नवम घर जातक के जीवन का भागेश का घर माना जाता है और यहीं से उसकी करियर के भाग्य को देखा था बिजनेस के भागी को देखा जाता दांपत्य के भाभी को देखा जाता है कि उसका कांड किस हद तक साथ देने वाला और यह भाग सबसे खास तौर पर धन कुटुंब के घर को देखता है पराग रमेश को देखता है।

कुंडली भाग्य का दशम घर कर्मेश का घर बनाया तो जिससे कार्य का घर भी कह सकते हैं यहां से आपके कार्यक्षेत्र को देखा जाता है क्या पर कार्यक्षेत्र कैसा है कोई भी जातक की कुंडली अगर कोई भी जोशी देखता है तो उसके कार्यक्षेत्र को देखना बहुत जरूरी होता है।

किसी भी जातक की कुंडली का 11वां घर कुंडली भाग्य का लाभ का घर माना जाता है और यहां से उसके जीवन के होने वाले फायदे देखे जाते हैं अगर इसमें अच्छे ग्रह पर रहे हैं और एक उचित राशि के साथ हैं तो उस व्यक्ति के व्यक्तित्व में और उसके जीवन में हमेशा लाभ ही लाभ है।

कुंडली भाग्य का 12 वा घर नुकसान हानि इत्यादि का घर माना जाता है यहां अगर कोई अच्छे ग्रहण नहीं पढ रहे हैं तो उस व्यक्ति या जातक के जीवन काल में फायदे हो ही नहीं सकते हैं।

कुंडली भाग्य किसी भी जातक के पूरे जीवन काल की भाषा परिभाषा को दृष्टि तौर पर लोगों के समक्ष प्रदर्शित करता है जिसके द्वारा हम अपने भविष्य को कहीं ना कहीं मंत्र जप तब यंत्र आदि के मदद से इसको शांत कर सकते हैं क्योंकि यहां पर विराजमान ग्रह अगर अच्छे हैं तो परिणाम स्वरूप अच्छा फल मिलता है लेकिन अगर कोई ग्रह आपके विपरीत हैं नीच के हैं नुकसान करने वाले हैं तो वह आपके जीवन में हमेशा नुकसान ही पहुंचाएंगे जिसके लिए आपको रेमेडीज की परम आवश्यकता होती है जिसके लिए आप किसी ज्योतिषी या पंडित का सलाह लेते हैं और वह आपको एक अच्छा मार्गदर्शन देते हैं।

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