Kundali क्या होती है?

Kundali क्या होती है?

पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी प्राणी का जन्म एक निश्चित समयावधि में होता है जिसकी जीवन काल की रूप रेखा ईश्वर के द्वारा तैयार की जाती है लेकिन पृथ्वी पर उनके जीवन काल की घटनाओ को जानने हेतु ज्योतिष विद्या का उद्गम हुआ | ज्योतिष विद्या के द्वारा कुछ गणना के आधार पर Kundali  का निर्माण हुआ है |  


Kundali क्या होती है?


ज्योतिष विद्या का भरपूर ज्ञान रखने वाले विद्वान ही ,पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्राणी के जीवन की घटनाओ के बारे में पूर्व में ही उस व्यक्ति को बता सकते है कि आपके आने वाले इस समय में  ऐसा होने वाला है और उस व्यक्ति को ज्योतिष विद्वान अवगत करा सकते है | 

Kundali क्या होती है ?

  ब्रह्माण्ड में मौजूद नौ ग्रह (सूर्य ,मंगल,बुध,चंद्र ,गुरु ,शुक्र,शनि व राहु ,केतु ) और मौजूद 27 नछत्रो और 12 राशिया ही Kundali का निर्माण करती है | इस कुंडली को ही जन्मकुंडली कहा जाता है |ज्योतिष विद्वान इन्ही गृह नछत्रो के आधार पर राशियों का निर्माण करते है और ये राशियाँ आपके जवान काल में घटित होने वाले कार्य के बारे में अवगत कराती हैं |इस धरती पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के जीवन का रहस्य जानने के लिए ज्योतिषी इनका निर्माण करके जातक के भविष्य को देखते है |     

Kundali से जातक का क्या पता लगाया जा सकता है ?

Kundali  किसी भी जातक के भविष्य के हर विषय के बारे में बयान करती है लेकिन इसके लिए ज्योतिषी विद्वान ही इनका आकलन कर सकते है और  ज्योतिषी ही इनके बारे में बता सकते है ,जिनको फलित ज्योतिष का ज्ञान होगा | Kundali बारह घर  बारह राशि  २७ नछत्र ही कुंडली का निर्माण करते हैं और  घर का अपना एक ब्यक्तित्वा है | 


  • प्रथम भाव जातक के शारीरिक ढांचे के बारे में बताता है कि मनुष्य किस रंग का है और उसका शारीरिक बनावट किस प्रकार का है ।
  • द्वितीय भाव से मनुष्य के कुटुंब और धन संपत्ति के बारे में गणना की जाती है और यहां से इन सारी चीजों को देखा जाता है।
  • तृतीय भाव के द्वारा जातक के पराक्रमी छोटे भाई बहन और आंख से संबंधित जानकारी प्राप्त की जाती है।
  • चतुर्थ भाव कुंडली के सुखेश को निरूपित करता है की आप किस प्रकार से सुखी हैं और यहीं से मातासुख की प्राप्ति को भी देखा जाता है।
  • पंचम भाव से विद्या संतान शौर्य आदि चीजों को यही से देखा जाता है इसे सुख संतान का घर इसीलिए कहा जाता है।
  • छठवां घर जातक के शत्रुवत भाव का घर माना जाता है जिसके जरिए जातक के सामने छुपे शत्रु और रोगों का आकलन किया जाता है।
  • सातवां भाव यानी कि सप्तमेश से जातक के दांपत्य जीवन को देखा जाता है और यहां से व्यापार आदि को भी देखा जाता है। शादी विवाह के बारे में जानकारी हेतु इस घर को सबसे पहले देखा जाता है।
  • अष्टमेश भाव जातक के आयु मृत्यु रोग इत्यादि का कारक घर माना जाता है और यहीं से इन सारी चीजों को बड़े ही आसानी से ज्योतिष द्वारा देखा जाता है।
  • नवम भाव जातक के भाग्य का घर माना जाता है और यहीं से जातक के भाग्य का आकलन किया जाता है।
  • दसवां घर कुंडली का कर्मेश घर माना जाता है जहां पर जातक के द्वारा किए गए कार्य को देखा जाता है और उसके सुख संपत्ति को यहीं से देख लिया जाता है।
  • ग्यारहवां भाव कुंडली के लाभ का घर माना जाता है जोकि जातक के जीवन में होने वाले सारे लाभ को प्रदर्शित करता है।
  • बारवा भाव Kundali का हानी का घर कहा जाता है जहां से जातक के जीवन में होने वाले नुकसान और उसके यात्रा वृद्धि को देखा जाता है।

Kundali के 12 घरों में लग्नेश से लेकर के और द्वादश घर तक किसी ना किसी घर में कोई ग्रह जरूर बैठे होते हैं और इन ग्रहों के बारे में ज्योतिष विद्वान गहन अध्ययन किए हुए होते हैं की कौन सा ग्रह अच्छा होता है और कौन सा ग्रह बुरा होता है कौन से ग्रह की किसके साथ बनती है और किसके साथ वह 17 भाव रखते हैं इन सारी बातों को ध्यान में रखकर ही कुंडली का अध्ययन किया जाता है इनमें यह देखना बहुत जरूरी होता है की किस भाव में कौन सा अच्छा ग्रह पड़ा है जो दृष्टिगत किसी नीच ग्रह के साथ युद्ध ना हो ऐसे ग्रह उस भाव को अधिक मजबूत करते हैं और उनके साथ कोई पापी ग्रह अगर दृष्टिगत है तो वह गलत कार्य ही उस भाव में पैदा करते हैं कुंडली के इन्हीं सब ग्रहों को गणित के माध्यम से कैलकुलेट करके ही उस व्यक्ति विषय के बारे में जानकारी दी जाती है और तभी वह जानकारी पूरी तरह से सही पाई जाती है।

Kundali बनाने के लिए क्या होना ज़रूरी है?

ज्योतिष विद्वान जब भी इनका कार्य प्रारंभ करते हैं तो उसके लिए सबसे पहले जातक के जन्म की तारीख का होना बहुत जरूरी होता है और जन्म तारीख के साथ उतना ही जरूरी जन्म का समय है जितना की जन्म तारीख क्योंकि जिस समय आप का जन्म हुआ उस दिन की तारीख अगर ज्योतिष विज्ञान को मिल जाती हैं तो उसी आधार पर उस समय के चलने वाले लग्नेश और सौरमंडल में विद्यमान ग्रह की चाल के आधार पर ज्योतिष विद्वान आपके कुंडली का निर्माण करते हैं इन सब के साथ में जन्म स्थान का होना भी बहुत जरूरी है क्योंकि जन्म स्थान अक्षांश ध्रुव को निर्देशित करता है और बताता है कि जहां पर आप का जन्म हुआ वहां पर कौन से ग्रह की क्या डिग्री थी अस्त तक के थे या अपनी प्रबल अवस्था में थे। इन तीनों चीजों का होना कुंडली निर्माण के लिए बहुत जरूरी है इनमें अगर कोई भी चीज त्रुटिपूर्ण है तो आपकी कुंडली भी त्रुटिपूर्ण बनेगी। क्योंकि गलत डाटा से गलत जानकारी को ही प्राप्त किया जा सकता है जब तक आपके पास वास्तविक जन्म तारीख जन्म समय और जन्म स्थान ना हो तब तक आप सही जन्म कुंडली का निर्माण नहीं करा सकते हैं। अतः कुंडली निर्माण के लिए इन सारी चीजों का होना बहुत जरूरी है।

आशा करता हूं की इन पोस्ट को पढ़ने के बाद में आपको यह पता चल गया होगा कि Kundali क्या होती है? ज्योतिष विद्वान  इनका निर्माण कर सकते हैं और इनकी विवेचना भी वही कर सकता
है।




  

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